जो मेरे हाल की गर्दिश कूँ देखे — वली दकनी
“Whoever beholds the dizzying whirl of my troubled plight, / A spinning vortex shall surely rise before their sight.”
अर्थ
जो व्यक्ति मेरी हालत की गर्दिश और उलझनों को देखेगा, उसे घूमता हुआ भंवर याद आ जाएगा।
विस्तार
शायर यहाँ अपनी बदहाली और ज़िंदगी के चक्कर को बहुत खूबसूरती से बयां कर रहे हैं। वे कहते हैं कि जो भी मेरी किस्मत की गर्दिश और लगातार बढ़ती बेचैनी को देखेगा, उसे पानी के उस तेज़ भंवर (गिर्दाब-ए-गर्दां) की याद आ जाएगी जो हर चीज़ को अपने अंदर डुबो लेता है। यह शेर दिल के उस बेबस तूफ़ान की तस्वीर है जहाँ से इंसान चाहकर भी बाहर नहीं निकल पाता।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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