'वली' मेरा जुनूँ जो कुइ कि देखे — वली दकनी
“O Vali, whosoever beholds this frenzy of mine, is reminded of desolate mountains and the barren wild.”
अर्थ
वली कहते हैं कि जो कोई भी मेरे पागलपन या दीवानेपन को देखता है, उसे पहाड़ और वीराने (जंगल) याद आ जाते हैं।
विस्तार
वली यहाँ अपनी दीवानगी और इश्क़ के जुनून की बेइंतहा शिद्दत को बयान कर रहे हैं। वे कहते हैं कि जो भी उनके हाल-ए-दिल और इस पागलपन को देखता है, उसे मजनूँ और फ़रहाद की तरह वीरान पहाड़ और बियाबान जंगल याद आ जाते हैं। उनका दर्द और तड़प इतनी असीम है कि वह किसी इंसान की चारदीवारी में नहीं समाती, बल्कि एक फैले हुए वीराने का मंज़र पेश करती है।
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