जो कुइ देखे मिरी अँखियाँ को रोते — वली दकनी

जो कुइ देखे मिरी अँखियाँ को रोते उसे अब्र-ए-बहाराँ याद आवे

“Whoever chances to behold these weeping eyes of mine, to mind would surely come the rain-clouds of spring.”

— वली दकनी

अर्थ

जो कोई भी मेरी आँखों को रोते हुए देखेगा, उसे बसंत के मौसम के बरसते बादलों की याद आ जाएगी।

विस्तार

इस शेर में शायर अपने आंसुओं की शिद्दत को वसंत की बारिश के ज़रिए बहुत ख़ूबसूरती से बयान करता है। वह कहता है कि जो भी उसकी रोती हुई आँखों को देखेगा, उसे 'अब्र-ए-बहाराँ' यानी बहार के मौसम के झमाझम बरसते बादलों की याद आ जाएगी। यह महज़ मामूली रोना नहीं, बल्कि दिल के गहरे दर्द का एक ऐसा सैलाब है जो सावन-भादों या बहार की मूसलाधार बारिश की तरह लगातार बह रहा है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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