तिरी ज़ुल्फ़ाँ में यू मुख जो कि देखे — वली दकनी

तिरी ज़ुल्फ़ाँ में यू मुख जो कि देखे उसे शम-ए-शबिस्ताँ याद आवे

“Whoever beholds your radiant face amidst your dark tresses is reminded of the glowing candle in the chamber of the night.”

— वली दकनी

अर्थ

जो कोई तुम्हारी ज़ुल्फ़ों के बीच तुम्हारा चेहरा देखता है, उसे रात के कमरे में जलती हुई शमा (मोमबत्ती) याद आ जाती है।

विस्तार

यहाँ शायर ने महबूब के चेहरे और उसकी काली ज़ुल्फ़ों के दरमियान के ख़ूबसूरत विरोधाभास को बड़ी नफ़ासत से पिरोया है। जब घनी और स्याह ज़ुल्फ़ों के बीच से चमकता हुआ चेहरा नज़र आता है, तो देखने वाले को रात की तन्हाई में जलती हुई कोई शमा याद आ जाती है। यह शेर हुस्न की उस दिलकश चमक को बयां करता है जो हर तरह के अंधेरे को चीरकर चारों ओर मोहब्बत का उजाला भर देती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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