तिरे मुख के चमन के देखने सूँ — वली दकनी
“Upon beholding the blooming garden of your face, / Rizwan's celestial paradise comes to mind.”
अर्थ
तुम्हारे चेहरे के बाग़ को देखने से मुझे रिज़वान का स्वर्ग (फ़िरदौस-ए-रिज़वाँ) याद आ जाता है।
विस्तार
इस शे’र में शायर अपने महबूब के चेहरे को एक खिलते हुए चमन (बाग़) की तरह देखता है, जिसकी ताज़गी और हुस्न सीधे जन्नत की याद दिलाते हैं। 'फ़िरदौस-ए-रिज़वाँ' स्वर्ग के उस सबसे ख़ूबसूरत बाग़ को कहते हैं, जिसके दरबान फ़रिश्ते रिज़वाँ हैं। आशिक़ कहना चाहता है कि महबूब के दीदार में जो सुकून और रूहानी ख़ुशी मिलती है, वह किसी दैवीय जन्नत के अहसास से कम नहीं है।
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