तिरे दो नैन जब देखूँ नज़र भर — वली दकनी

तिरे दो नैन जब देखूँ नज़र भर मुझे तब नर्गिसिस्ताँ याद आवे

“Whenever I gaze fully into your two eyes, / A garden of narcissus comes to my mind.”

— वली दकनी

अर्थ

जब मैं तुम्हारी दोनों आँखों को नज़र भरकर देखता हूँ, तब मुझे नरगिस के फूलों का बाग़ याद आ जाता है।

विस्तार

उर्दू शायरी में महबूब की खूबसूरत और नशीली आँखों की तुलना अक्सर नरगिस के फूल से की जाती है। यहाँ शायर कहता है कि जब वह जी भरकर अपने महबूब के नैनों में देखता है, तो उसे फूलों से महकता हुआ पूरा बाग़ यानी 'नर्गिसिस्ताँ' याद आ जाता है। यह शेर उस मदहोश कर देने वाले अहसास को बयां करता है जहाँ किसी की आँखों में झांकते ही हुस्न की पूरी कायनात नज़र आने लगती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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