तिरा लब देख हैवाँ याद आवे — वली दकनी

तिरा लब देख हैवाँ याद आवे तिरा मुख देख कनआँ याद आवे

“Beholding your lips brings the Water of Life to mind; looking upon your face calls the fair land of Canaan to mind.”

— वली दकनी

अर्थ

तुम्हारे होंठों को देखकर आब-ए-हयात (अमृत) याद आता है, और तुम्हारा सुंदर चेहरा देखकर कनान की याद आ जाती है।

विस्तार

शायर अपने महबूब के हुस्न की तारीफ़ दो बेहद ख़ूबसूरत और मशहूर मिसालों से कर रहा है। महबूब के लबों को देखकर 'आब-ए-हैवाँ' यानी ज़िंदगी बख़्शने वाले अमृत की याद आती है, मानो उनकी एक बात या मुस्कान रूह को अमर कर दे। वहीं उनका नूरानी चेहरा देखकर 'कनआन' का ख़याल आता है, जो हज़रत यूसुफ़ के बेमिसाल हुस्न का मुल्क था। सीधे लफ़्ज़ों में कहें तो आशिक़ के लिए महबूब का दीदार मुकम्मल ज़िंदगी और बेपनाह खूबसूरती का एहसास है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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