हम कूँ बर्दाश्त नहीं ग़ुस्से की — वली दकनी

हम कूँ बर्दाश्त नहीं ग़ुस्से की बे-सबब ग़ुस्से में आया न करो

“I have no endurance to bear such wrath; do not fly into a rage without a cause.”

— वली दकनी

अर्थ

मुझसे ग़ुस्सा बर्दाश्त नहीं होता, इसलिए बिना किसी वजह के ग़ुस्से में मत आया करो।

विस्तार

दकनी उर्दू के ख़ास अंदाज़ में रचा गया यह शेर महबूब से की गई एक बेहद मासूम और नाज़ुक इल्तिजा है। आशिक़ कोई शिकवा नहीं कर रहा, बल्कि अपनी नफ़ासत और कमज़ोरी बयां कर रहा है कि उसका दिल इतना नाज़ुक है कि महबूब की ज़रा-सी नाराज़गी भी नहीं झेल सकता। इस सादगी भरी गुज़ारिश के पीछे असल में बेपनाह उल्फ़त छिपी है, जहां अपने प्यार के बे-सबब ग़ुस्से से भी दिल सहम जाता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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