निगह-ए-तल्ख़ सूँ अपनी ज़ालिम — वली दकनी

निगह-ए-तल्ख़ सूँ अपनी ज़ालिम ज़हर का जाम पिलाया न करो

“With that bitter glance of yours, O cruel one, do not make me drink this cup of poison.”

— वली दकनी

अर्थ

ऐ ज़ालिम! अपनी कड़वी नज़रों से मुझे ज़हर का प्याला मत पिलाया करो।

विस्तार

शायर यहाँ अपने महबूब की बेरुखी और तीखी नज़रों के दर्द को बहुत सादगी से बयां कर रहा है। जिस नज़र में मुहब्बत की मिठास होनी चाहिए थी, वही नज़र जब कड़वाहट और गुस्से से भर जाती है, तो आशिक़ के लिए किसी ज़हर के घूंट की तरह जानलेवा बन जाती है। यह महबूब से की गई एक नाज़ुक इल्तिजा है कि अपनी खामोश बेरहमी से दिल पर यह सितम न ढाए।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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