तुझ इश्क़ में जल जल कर सब तन कूँ किया काजल ये रौशनी अफ़ज़ा है अँखिया को लगाती जा

“Burning in the fire of your love, my whole body has turned to kohl; It only brightens the sight—go on, trace it into your eyes.”

— वली दकनी
अर्थ

तुम्हारे इश्क़ में जल-जल कर मैंने अपने पूरे शरीर को काजल बना लिया है। यह आँखों की रौशनी बढ़ाने वाला है, इसलिए इसे अपनी आँखों में लगाती जाओ।

विस्तार

आशिक़ कहता है कि महबूब के इश्क़ की आग में जलते-जलते उसका पूरा वजूद ख़ाक होकर काजल बन चुका है। मगर इस तबाह होने पर भी कोई शिकवा नहीं, बल्कि वह चाहता है कि माशूक़ इस काजल को अपनी आँखों में लगा ले क्योंकि सुरमा तो निगाहों की रौशनी बढ़ाता है। यह मोहब्बत में फ़ना होने की ऐसी दिलकश दास्तान है जहाँ आशिक़ अपनी बर्बादी को भी महबूब के हुस्न और नूर का ज़रिया बना देना चाहता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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