मुझ दिल के कबूतर कूँ बाँधा है तिरी लट ने ये काम धरम का है टुक उस को छुड़ाती जा

“Your curling lock has ensnared the dove of my heart; an act of sacred virtue it would be—pray, set it free as you depart.”

— वली दकनी
अर्थ

तुम्हारी लट ने मेरे दिल के कबूतर को बाँध लिया है; यह भलाई और धर्म का काम है, इसलिए जाते हुए ज़रा इसे आज़ाद करती जाओ।

विस्तार

इस शेर में शायर ने अपने नाज़ुक दिल की तुलना एक कबूतर से की है, जो महबूब की उलझी हुई ज़ुल्फ़ों के जाल में फँस गया है। वह बड़ी मासूमियत और नज़ाकत से कहता है कि किसी बेज़ुबान परिंदे को आज़ाद करना तो धर्म और पुण्य का काम है, इसलिए जाते-जाते इस दिल को रिहा करती जाओ। इस इल्तिजा में एक प्यारी सी शरारत छिपी है—आज़ादी माँगने के बहाने आशिक़ दरअसल महबूब का ध्यान और उसका क़ुर्ब पाना चाहता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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