बरजा है गर सुनूँ नईं नासेह तिरी नसीहत मैं जाम-ए-इश्क़ पी कर मस्ताना हो रहा हूँ

“It is only right if I heed not your counsel, O moralist; having drunk deep from love's cup, I am lost in intoxication.”

— वली दकनी
अर्थ

ऐ उपदेशक! अगर मैं तुम्हारी नसीहत न सुनूँ तो यह बिल्कुल उचित है, क्योंकि मैं इश्क़ का प्याला पीकर मदहोश हो रहा हूँ।

विस्तार

यहाँ शायर दुनिया के उपदेशक यानी 'नासेह' से बड़ी बेबाकी और सादगी से कहता है कि उसकी नसीहतों को अनसुना करना ही मुनासिब है। इश्क़ के जाम ने उसे एक ऐसी मदहोशी और आज़ादी बख़्शी है, जहाँ अक़्ल और कायदों की बंदिशें बेअसर हो जाती हैं। यह शेर दिखाता है कि जब दिल मोहब्बत के सुरूर में डूब जाता है, तो दुनिया की संजीदा सीख उसके आगे पूरी तरह बेमानी हो जाती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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