सौदा-ए-ज़ुल्फ़-ए-ख़ूबाँ रखता हूँ दिल में दाइम ज़ंजीर-ए-आशिक़ी का दीवाना हो रहा हूँ

“Forever in my heart I bear a madness for the tresses of the fair; enamored of the very chains of love, I am driven mad.”

— वली दकनी
अर्थ

मैं अपने दिल में हमेशा सुंदरियों की ज़ुल्फ़ों की दीवानगी पाले रखता हूँ, और इश्क़ की ज़ंजीरों का दीवाना बनता जा रहा हूँ।

विस्तार

उर्दू शायरी में महबूब की ज़ुल्फ़ों को अक्सर ज़ंजीर से तशबीह दी जाती है, जो आशिक़ के दिल को अपनी गिरफ़्त में ले लेती हैं। इस शेर में आशिक़ कहता है कि उसके दिल में इन ज़ुल्फ़ों का जुनून हमेशा बना रहता है, और अब उसे इश्क़ की इसी क़ैद से मुहब्बत हो गई है। यहाँ रिहाई चाहने के बजाय प्रेम की बेड़ियों और उसके दीवानेपन को ही ज़िंदगी का सबसे हसीन मक़सद मान लिया गया है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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