जिस की गुफ़्तार में नहीं है मज़ा सुख़न उस का तआ'म बासी है

“He whose speech possesses neither charm nor savor, His verse is like stale food, devoid of flavor.”

— वली दकनी
अर्थ

जिस व्यक्ति की बातचीत में कोई मज़ा या आकर्षण नहीं होता, उसकी शायरी या कलाम बासी खाने की तरह बेस्वाद होता है।

विस्तार

शायर ने यहाँ बातचीत और शायरी के लुत्फ़ को खाने के स्वाद से जोड़कर एक सादा मगर बेहद दिलचस्प रूपक पेश किया है। जैसे बासी खाना अपनी खुशबू, गर्मी और ज़ायका खो बैठता है और किसी को पसंद नहीं आता, वैसे ही बेमज़ा और बेअसर बात भी दिल पर बोझ बन जाती है। शायरी हो या आम बोलचाल, उसमें ताज़गी और रूहानी मिठास का होना ज़रूरी है ताकि वह सुनने वाले की रूह को तृप्त कर सके।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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