जो अपने तन कूँ मिस्ल-ए-जूएबार अव्वल किया पानी हुआ उस सर्व-क़द सूँ हम-कनार आहिस्ता-आहिस्ता

“The one who first dissolved his being like a flowing stream / Came slowly, softly to embrace that cypress-tall beloved.”

— वली दकनी
अर्थ

जिसने पहले अपने शरीर को बहती नदी की तरह पानी बना दिया, वह धीरे-धीरे उस सर्व जैसे लंबे क़द वाले महबूब के आलिंगन में आ गया।

विस्तार

वली दकनी ने यहाँ समर्पण की बेहद ख़ूबसूरत तस्वीर खींची है। जैसे नदी किनारे खड़े ऊँचे और सीधे 'सर्व' के दरख़्त को बहता पानी अपनी रवानी में धीरे-धीरे छू लेता है, वैसे ही आशिक़ को भी अपने वजूद और अहंकार को पानी की तरह पिघलाना पड़ता है। जब तक आप ख़ुद को पूरी तरह मिटाकर विनम्र नहीं बना लेते, तब तक उस दिलकश महबूब के आगोश में समाना मुमकिन नहीं होता।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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