न कर शमशाद की तारीफ़ मुझ पास कि मैं उस सर्व-क़द का मुब्तला हूँ

“Praise not the graceful box-tree before me, for I am captivated by that cypress-statured beloved.”

— वली दकनी
अर्थ

मेरे सामने शमशाद के पेड़ की तारीफ़ मत करो, क्योंकि मैं उस सरव जैसे सीधे और सुंदर क़द वाले महबूब के प्यार में गिरफ़्तार हूँ।

विस्तार

इस शेर में आशिक़ अपने दोस्त से कहता है कि मेरे सामने शमशाद के दरख़्त की ख़ूबसूरती की तारीफ़ मत करो, क्योंकि मेरा दिल तो अपनी उस महबूब पर निसार है जो सरू के पेड़ जैसी दिलकश और क़यामत की अदा रखती है। उर्दू शायरी में 'सर्व' और 'शमशाद' दोनों ही सीधे, नाज़ुक और शानदार क़द की मिसाल माने जाते हैं। मगर शायर का कहना है कि जब निगाहें किसी एक की बेमिसाल रफ़्तार और क़द-ओ-क़ामत पर ठहर चुकी हों, तो फिर दुनिया का कोई भी दूसरा हुस्न दिल को नहीं भाता।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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