“I have no desire to meet each moon-faced fair; I am a companion only to one who knows the art of verse.”
मुझे हर खूबसूरत इंसान से मिलने का कोई शौक नहीं है, मैं तो केवल शायरी की समझ रखने वाले का दोस्त हूँ।
इस शेर में शायर ज़ाहिरी खूबसूरती और रूहानी समझ के फ़र्क़ को बेहद सादगी से बयां करते हैं। वे कहते हैं कि उन्हें महज़ खूबसूरत चेहरों की चाह नहीं है, बल्कि उनका दिल तो सिर्फ़ उसी का साथी बनता है जो शायरी और लफ़्ज़ों की नज़ाकत को समझ सके। यह शेर सिखाता है कि चेहरे के हुस्न से कहीं ज़्यादा क़ीमती ज़ेहनी और रूहानी ताल्लुक़ होता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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