फ़ौक़ियत ले गया हूँ बुलबुल सूँ गरचे मंसब में दो-हज़ारी है

“I have won precedence over the nightingale, though in noble rank it commands two thousand.”

— वली दकनी
अर्थ

मैं बुलबुल से बाज़ी जीत गया हूँ और उससे आगे निकल गया हूँ, हालाँकि वह दर्जे और पदवी में दो-हज़ारी मनसबदार है।

विस्तार

उर्दू शायरी में बुलबुल को इश्क़ और वफ़ा का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है, जिसे शायर ने किसी शाही दरबारी की तरह 'दो-हज़ारी' मंसब का रुतबा दिया है। लेकिन आशिक़ बड़े नाज़ और शोख़ी से कहता है कि तड़प, दीवानगी और दर्द के मामले में वह इस मशहूर परिंदे से भी कहीं आगे निकल चुका है। यह शेर इस बात का बड़ा प्यारा इज़हार है कि इंसान का सच्चा जज़्बा हर बने-बनाए अफ़साने से कहीं गहरा होता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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