“I have won precedence over the nightingale, though in noble rank it commands two thousand.”
मैं बुलबुल से बाज़ी जीत गया हूँ और उससे आगे निकल गया हूँ, हालाँकि वह दर्जे और पदवी में दो-हज़ारी मनसबदार है।
उर्दू शायरी में बुलबुल को इश्क़ और वफ़ा का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है, जिसे शायर ने किसी शाही दरबारी की तरह 'दो-हज़ारी' मंसब का रुतबा दिया है। लेकिन आशिक़ बड़े नाज़ और शोख़ी से कहता है कि तड़प, दीवानगी और दर्द के मामले में वह इस मशहूर परिंदे से भी कहीं आगे निकल चुका है। यह शेर इस बात का बड़ा प्यारा इज़हार है कि इंसान का सच्चा जज़्बा हर बने-बनाए अफ़साने से कहीं गहरा होता है।
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