ऐ अज़ीज़ाँ मुझे नहीं बर्दाश्त संग-दिल का फ़िराक़ भारी है

“O dear companions, I can bear this no more; parting from the stone-hearted one is too heavy a burden.”

— वली दकनी
अर्थ

हे प्यारे दोस्तों, मुझसे अब यह सहन नहीं होता, उस पत्थरदिल महबूब की जुदाई का ग़म बहुत भारी है।

विस्तार

इस शेर में शायर अपने अज़ीज़ दोस्तों के सामने दिल खोलकर अपनी बेबसी बयां करता है। महबूब को 'संग-दिल' यानी पत्थर दिल कहा गया है, जिसकी जुदाई का ग़म किसी भारी चट्टान की तरह सीने पर धर दिया गया हो। यह उस नाज़ुक मोड़ की तस्वीर है जहाँ सब्र का बाँध टूट जाता है और इंसान अपने अज़ीज़ों के कंधे पर सर रखकर रो देना चाहता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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