चाहता है इस जहाँ में गर बहिश्त जा तमाशा देख उस रुख़्सार का

“If paradise in this world is what you seek, go and behold the wonder of that cheek.”

— वली दकनी
अर्थ

अगर तुम इस दुनिया में स्वर्ग देखना चाहते हो, तो जाकर अपने महबूब के रुख़्सार (गाल) का दीदार करो।

विस्तार

शायर बड़ी सादगी और ख़ूबसूरती से कहता है कि अगर तुम्हें इसी दुनिया में जन्नत का दीदार करना है, तो कहीं और भटकने की ज़रूरत नहीं—बस महबूब के रुख़्सार की चमक देख लो। महबूब के चेहरे की ताज़गी और हुस्न को यहाँ बहिश्त यानी स्वर्ग का जीता-जागता करिश्मा बताया गया है। शायरी की दुनिया में जब इश्क़ परवान चढ़ता है, तो महबूब की एक झलक ही तमाम दुनियावी रंज-ओ-ग़म भुलाकर जन्नत जैसा सुकून बख़्श देती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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