“If paradise in this world is what you seek, go and behold the wonder of that cheek.”
अगर तुम इस दुनिया में स्वर्ग देखना चाहते हो, तो जाकर अपने महबूब के रुख़्सार (गाल) का दीदार करो।
शायर बड़ी सादगी और ख़ूबसूरती से कहता है कि अगर तुम्हें इसी दुनिया में जन्नत का दीदार करना है, तो कहीं और भटकने की ज़रूरत नहीं—बस महबूब के रुख़्सार की चमक देख लो। महबूब के चेहरे की ताज़गी और हुस्न को यहाँ बहिश्त यानी स्वर्ग का जीता-जागता करिश्मा बताया गया है। शायरी की दुनिया में जब इश्क़ परवान चढ़ता है, तो महबूब की एक झलक ही तमाम दुनियावी रंज-ओ-ग़म भुलाकर जन्नत जैसा सुकून बख़्श देती है।
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