“I lacked the strength to make my way, and yet / Borne by the power of my sighs, I reached your street.”
मुझमें यहाँ आने की शारीरिक शक्ति नहीं थी, लेकिन अपनी गहरी आहों के सहारे और ज़ोर पर मैं तुम्हारी गली तक पहुँच गया।
इस शेर में आशिक़ अपनी बेबसी और इश्क़ के अनोखे ज़ोर की बात कर रहा है। वह इतना कमज़ोर हो चुका था कि ख़ुद चल कर जाना मुमकिन न था, लेकिन सीने से निकली दर्द भरी आहों के तूफ़ान ने उसे महबूब की गली तक पहुँचा दिया। यह तड़प और चाहत की वह इंतिहा है जहाँ जिस्म की नाताक़ती पर रूह की बेचैनी पूरी तरह ग़ालिब आ जाती है।
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