सनम आए करूँगा नाला-ए-जाँ-सोज़ कूँ ज़ाहिर मगर उस संग-दिल सूँ मेहरबानी की सदा निकले

“When my beloved comes, I shall reveal my soul-searing lament, if only from that stone-hearted one a voice of mercy would arise.”

— वली दकनी
अर्थ

जब मेरा महबूब आएगा तो मैं अपनी जान जलाने वाली फ़रियाद उसके सामने ज़ाहिर करूँगा, शायद उस पत्थर-दिल से मेहरबानी की कोई आवाज़ निकल आए।

विस्तार

इस शेर में शायर ने महबूब को 'सनम' यानी पत्थर की मूरत और 'संग-दिल' कहकर एक बेहद खूबसूरत और दर्द भरा मंज़र खींचा है। आशिक सोचता है कि जब महबूब सामने आएगा, तो वह अपनी रूह को झुलसा देने वाली तड़प और चीख़ उसके सामने रख देगा। दिल में बस एक भोली सी उम्मीद है कि शायद इस बेपनाह दर्द को देखकर उस बेपरवाह, पत्थर जैसे दिल से भी मोहब्बत और रहम का कोई बोल फूट पड़े।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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