निसार उस के क़दम ऊपर करूँ अंझुवाँ के गौहर सब अगर करने कूँ दिल-जूई वो सर्व-ए-ख़ुश-अदा निकले

“At their feet I would scatter all the pearls of my tears, if that graceful cypress should step forth to console my heart.”

— वली दकनी
अर्थ

अगर वह ख़ूबसूरत चाल वाला महबूब मेरे दिल की तसल्ली के लिए बाहर निकले, तो मैं अपने आँसुओं के सारे मोती उसके क़दमों पर न्योछावर कर दूँ।

विस्तार

यहाँ शायर ने जुदाई के दर्द को एक बेहद ख़ूबसूरत और अनमोल तोहफ़े में बदल दिया है। वे कहते हैं कि महबूब के इंतज़ार में बहने वाले आँसू महज़ पानी नहीं, बल्कि सच्चे मोती हैं। अगर वह सर्व जैसी दिलकश और छरहरी क़ामत वाला महबूब इस टूटे हुए दिल को तसल्ली देने आ जाए, तो ये सारे अश्क-ए-गौहर उसके क़दमों पर न्योछावर करने के लिए तैयार हैं।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठUnavailable
हिंदी अर्थUnavailable
अंग्रेज़ी अर्थUnavailable
हिंदी विस्तारUnavailable
अंग्रेज़ी विस्तारUnavailable
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.