ग़ज़ल

आप-हम

آپ-ہم
सुरेश दलाल· Ghazal· 6 shers

यह ग़ज़ल प्रेम के दो अलग-अलग दृष्टिकोणों को खूबसूरती से चित्रित करती है: एक जो केवल प्रेम के बारे में बातें करता है, और दूसरा जो अपने कर्मों से प्रेम को जीता है। वक्ता एक निस्वार्थ और गहरी समर्पित प्रेमी का प्रतिनिधित्व करता है जो प्रेम करने के कार्य में ही अर्थ पाता है, बिना किसी कारण या शर्त के।

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लिपि व अर्थ
1
રાતદિવસનો રસ્તો વ્હાલમ નહીં તો ખૂટે કેમ? તમે પ્રેમની વાતો કરજો : અમે કરીશું પ્રેમ.
हे प्रिय, दिन और रात का यह रास्ता भला और कैसे समाप्त होगा? तुम प्रेम की बातें करना, हम तो प्रेम करेंगे।
2
તમે રેતી કે હથેલી ઉપર લખો તમારું નામ, અમે એટલા ઘેલા, ઘાયલ : નહીં નામ કે ઠામ.
तुम अपना नाम रेत पर या अपनी हथेली पर लिख सकते हो। हम इतने पागल और घायल हैं कि हमारा न कोई नाम है और न कोई ठिकाना।
3
તમને તો કોઈ કારણ અમને નહીં બહાનાં નહીં વ્હેમ, તમે પ્રેમની વાતો કરજો : અમે કરીશું પ્રેમ.
आपके पास तो कोई कारण है, हमें कोई बहाना या संदेह नहीं है। आप प्रेम की बातें कीजिएगा, हम तो प्रेम करेंगे।
4
તમને વાદળ, ધુમ્મસ વહાલાં અમને ઊજળી રાત, અમે તમારાં ચરણ ચૂમશું થઈને પારિજાત.
तुम्हें बादल और कोहरा प्रिय हैं, हमें उजली रात। हम पारिजात बनकर तुम्हारे चरणों को चूमेंगे।
5
અહો આંખથી ગંગાયમુના વહે એમ ને એમ, તમે પ્રેમની વાતો કરજો: અમે કરીશુ પ્રેમ.
आँखों से गंगा-यमुना की तरह निरंतर आँसू बहते हैं। तुम प्रेम की बातें करो, हम तो प्रेम करेंगे।
6
(સપ્ટેમ્બર ૧૯૭૧)
यह सितंबर १९७१ को दर्शाता है।
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