ग़ज़ल
देखी बहार हम ने कल ज़ोर मय-कदे में
دیکھی بہار ہم نے کل زور مے کدے میں
यह ग़ज़ल मयकदे के उल्लासमय और मदहोश कर देने वाले वातावरण का चित्रण करती है, जहाँ महबूब की हँसी और मौजूदगी से बहार छा जाती है। शायर शराब और इश्क़ के जोश में दिल के ज़ख़्मों को नाचते हुए मोरों के समान प्रस्तुत कर प्रेम की गहन मस्ती और आनंद को दर्शाता है।
Source: rekhta · HI
गीत सुनें
अभी गीत नहीं
1
देखी बहार हम ने कल ज़ोर मय-कदे में
हँसने सीं उस सजन के था शोर मय-कदे में
कल हमने मयकदे में कमाल की बहार देखी, क्योंकि उस महबूब के हँसने से पूरे मयकदे में शोर और रौनक मची हुई थी।
2
थे जोश-ए-मुल सीं ऐसी शोरिश में दाग़ दिल के
गोया कि कूदते हैं ये मोर मय-कदे में
शराब के जोश के कारण दिल के दाग़ ऐसी हलचल और उन्माद में थे, मानो मैख़ाने में मोर नाचते-कूदते फिर रहे हों।
3
फंदा रखा था मैं ने शायद कि वो परी-रू
देखे तो पास मेरे हो दौर मय-कदे में
मैंने एक जाल बिछाया था कि शायद वह परी जैसा सुंदर महबूब इसे देखे और मयख़ाने में शराब के दौर के दौरान मेरे करीब आ जाए।
4
है आरज़ू कि हमदम वो माह-रू हो मेरा
दे शाम सीं जो प्याला हो भोर मय-कदे में
मेरी यह इच्छा है कि वह चाँद जैसे चेहरे वाला महबूब मेरा साथी बने, जो शाम से शराब का प्याला थमाए और मयखाने में सुबह हो जाए।
5
साक़ी वही है मेरा 'नाजी' कि गर मरूँ मैं
मुझ वास्ते बना दे जा गोर मय-कदे में
ऐ नाजी, मेरा सच्चा साक़ी वही है जो अगर मैं मर जाऊँ, तो मयकदे (शराबख़ाने) के अंदर ही मेरी क़ब्र के लिए जगह बना दे।
Comments · 0
Free — just your email. You'll come right back here.
No comments yet. Be the first.
