फंदा रखा था मैं ने शायद कि वो परी-रू देखे तो पास मेरे हो दौर मय-कदे में

“I had laid a snare in hope that fairy-faced beauty might see, and the tavern's circling wine-cup turn its round toward me.”

— शाकिर नाजी
अर्थ

मैंने एक जाल बिछाया था कि शायद वह परी जैसा सुंदर महबूब इसे देखे और मयख़ाने में शराब के दौर के दौरान मेरे करीब आ जाए।

विस्तार

शायर यहाँ मयकदे का एक बड़ा ही दिलचस्प मंज़र पेश करता है, जहाँ उसने उस परी जैसी ख़ूबसूरत साक़ी का ध्यान खींचने के लिए एक छोटा सा बहाना या फंदा लगाया था। उसकी आरज़ू बस इतनी है कि साक़ी की नज़र उस पर पड़ जाए और शराब का जो दौर चल रहा है, वह घूमकर उसके पास भी आ पहुँचे। यह महबूब की एक झलक और तवज्जो पाने के लिए आशिक़ की मासूम बेताबी और कोशिश को ख़ूबसूरती से बयां करता है।

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