साक़ी वही है मेरा 'नाजी' कि गर मरूँ मैं मुझ वास्ते बना दे जा गोर मय-कदे में

“He alone is my true cupbearer, O Naji, who if I die, will make my resting grave right within the tavern.”

— शाकिर नाजी
अर्थ

ऐ नाजी, मेरा सच्चा साक़ी वही है जो अगर मैं मर जाऊँ, तो मयकदे (शराबख़ाने) के अंदर ही मेरी क़ब्र के लिए जगह बना दे।

विस्तार

नाजी यहाँ मयकदे और साक़ी से अपने गहरे लगाव को बड़े दिलकश अंदाज़ में बयाँ कर रहे हैं। वो कहते हैं कि मेरा सच्चा साक़ी वही है, जो मेरी रूह की प्यास समझे और मरने के बाद मुझे दुनिया के रस्म-ओ-रिवाज वाले क़ब्रिस्तान में नहीं, बल्कि इसी मयकदे की मिट्टी में दफ़्न कर दे। उर्दू शायरी में मयकदा महज़ शराबख़ाना नहीं, बल्कि बेरिया मुहब्बत और सूफ़ियाना मस्ती का ठिकाना है, जहाँ आशिक़ हमेशा के लिए महफ़ूज़ रहना चाहता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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