है आरज़ू कि हमदम वो माह-रू हो मेरा दे शाम सीं जो प्याला हो भोर मय-कदे में

“It is my heart's desire that the moon-faced one be my companion, who pours me wine from dusk until dawn breaks in the tavern.”

— शाकिर नाजी
अर्थ

मेरी यह इच्छा है कि वह चाँद जैसे चेहरे वाला महबूब मेरा साथी बने, जो शाम से शराब का प्याला थमाए और मयखाने में सुबह हो जाए।

विस्तार

शायर यहाँ अपने दिल की एक बेहद खूबसूरत ख़्वाहिश बयान कर रहे हैं कि उनका साथी कोई ऐसा हसीन हो जिसका चेहरा चाँद जैसा दमकता हो। वे एक ऐसी मदहोश कर देने वाली रात का सपना देख रहे हैं जहाँ मैख़ाने में शाम से शुरू हुआ मुलाक़ात और जाम का यह सिलसिला सुबह के उजाले तक चलता रहे। यह सिर्फ़ शराब की बात नहीं, बल्कि वक़्त और दुनिया को भुलाकर अपने महबूब के संग पूरी रात खो जाने की गहरी तड़प है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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