लखनऊ जिन से इबारत थी हुए वो नापदीद है निशान-ए-लखनऊ बाक़ी न शान-ए-लखनऊ

“Those who were the very soul of Lucknow have vanished out of sight; neither a trace of Lucknow remains, nor its former glorious might.”

— नज़्म तबातबाई
अर्थ

जिन लोगों से लखनऊ की पहचान थी वे अब दुनिया से ओझल हो चुके हैं, अब न तो लखनऊ का कोई निशान बाक़ी बचा है और न ही उसकी शान।

विस्तार

यह शेर लखनऊ की खोई हुई नफ़ासत और तहज़ीब का एक गहरा और भावुक मातम है। शायर बेहद दर्द के साथ कहता है कि जिन अज़ीम लोगों से इस शहर की पहचान, अदब और रूह बंधी थी, वे सब अब ओझल हो चुके हैं। उनके जाने के बाद न तो शहर की वह पुरानी शान बची है और न ही उसकी कोई सच्ची निशानी—क्योंकि किसी भी शहर का वजूद उसकी इमारतों से नहीं, बल्कि वहाँ के बाशिंदों के अंदाज़ से चमकता है।

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