चलता था जब घुटनियों अपने यहाँ तिफ़्ल-ए-रज़ीअ' सज्दा करते थे उसे गर्दन-कुशान-ए-लखनऊ

“When yet a nursing babe was crawling on his knees in our demesne, / The proud and haughty necks of Lucknow bowed down in homage plain.”

— नज़्म तबातबाई
अर्थ

जब हमारे यहाँ कोई दूध पीता मासूम बच्चा घुटनों के बल चलता था, तब लखनऊ के बड़े-बड़े घमंडी और सरकश लोग भी उसके आगे सजदा करते थे।

विस्तार

इस शेर में दिल्ली की साहित्यिक शान और पुराने रुतबे का बड़ा पुरअसर और फखरिया मंज़र पेश किया गया है। शायर कहते हैं कि हमारे शहर या खानदान में जब कोई मासूम बच्चा भी घुटनों के बल चलता था, तो लखनऊ के बड़े-बड़े मगरूर और नामी लोग उसके सामने अदब से सर झुकाते थे। यह शेर लखनऊ और दिल्ली की मशहूर अदबी नोक-झोंक की याद दिलाता है, जहाँ दिल्ली वाले अपनी तहज़ीब की पैदाइशी महारत पर गर्व करते थे।

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