जिगर-ख़राशी से पाई फ़ुर्सत न सीना-कावी से नाख़ुनों ने गला गरेबाँ ने घूँट डाला जुनूँ की शोरिश से तंग हो कर

“My nails found no respite from tearing the heart, nor from raking the chest; / Weary of madness's wild uproar, the collar itself choked the throat.”

— नज़्म तबातबाई
अर्थ

नाखूनों को जिगर खरोंचने और सीना चीरने से कोई फ़ुर्सत नहीं मिली। आख़िरकार दीवानगी के इस हंगामे से तंग आकर गिरेबान ने ख़ुद ही गला घोंट दिया।

विस्तार

इस शेर में दीवानगी और दर्द की इंतिहा को एक बेहद दिलचस्प अंदाज़ में बयान किया गया है। इश्क़ के पागलपन में आशिक़ के नाख़ून लगातार सीने और जिगर को छलनी कर रहे थे, उन्हें एक पल भी फ़ुरसत न थी। आशिक़ के इस रोज़-रोज़ के हंगामे और चीर-फाड़ से तंग आकर ख़ुद उसके गरेबाँ ने उसका गला ही घोंट दिया, ताकि यह बेइंतहा बेचैनी और दर्द हमेशा के लिए ख़त्म हो जाए।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठUnavailable
हिंदी अर्थUnavailable
अंग्रेज़ी अर्थUnavailable
हिंदी विस्तारUnavailable
अंग्रेज़ी विस्तारUnavailable
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.