“If the Sufi would but grasp this subtle truth—that existence is a mystic concert of ecstatic song—then these nine sky-bowls would ring out at once, chiming like a jal-tarang.”
यदि सूफ़ी यह बारीक बात समझ ले कि यह अस्तित्व संगीत की एक महफ़िल है, तो आकाश के ये नौ प्याले अभी जल-तरंग की तरह बज उठेंगे।
शायर सूफ़ी को ज़िंदगी का एक गहरा और ख़ूबसूरत राज़ समझाते हैं कि यह कायनात कोई सूखी या उदास जगह नहीं, बल्कि रूहानी मस्ती और संगीत की एक महफ़िल है। अगर सूफ़ी इस बारीक सच को समझ ले, तो आकाश के नौ फलक जल-तरंग के प्यालों की तरह रूहानी धुन छेड़ने लगेंगे। यानी पूरी सृष्टि को जब प्यार और रक़्स की नज़र से देखा जाए, तो सारा ब्रह्मांड एक दिव्य राग बन जाता है।
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