उतरा जो शीशा ताक़ से ज़ाहिद का है ये हाल करता है रक़्स सज्दा-ए-शुकराना छोड़ कर

“No sooner was the wine flask lowered from the niche, behold the pious ascetic's stance: Abandoning his prostration of thanksgiving, he has broken into dance.”

— नज़्म तबातबाई
अर्थ

जैसे ही ताक़ से शराब की बोतल नीचे उतारी गई, तपस्वी (ज़ाहिद) का यह हाल हो गया कि वह ईश्वर के शुक्र का सजदा छोड़कर खुशी से नाचने लगा।

विस्तार

इस शेर में ज़ाहिद यानी ख़ुद को परहेज़गार बताने वाले पर बड़ा ही मीठा और चुटीला तंज़ किया गया है। जैसे ही शराब की सुराही ताक़ से नीचे उतारी जाती है, उसका सारा संयम बिखर जाता है और वह इबादत का सजदा छोड़कर बेख़ुदी में नाचने लगता है। शायर हल्के-फुल्के अंदाज़ में यह दिखा रहा है कि बनावटी पाखंड कभी भी इंसान की असली फ़ितरत और दिल की चाहत के सामने टिक नहीं पाता।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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