मुरव्वत से हो बेगाना वफ़ा से दूर हो कोसों ये सच है नाज़नीं हो ख़ूबसूरत हो मगर क्या हो

“A stranger to kindness, leagues away from being true; it's true you are lovely and delicate, but what does that make of you?”

— नज़्म तबातबाई
अर्थ

तुम शराफ़त व लिहाज़ से अनजान हो और वफ़ा से कोसों दूर हो; यह सच है कि तुम नाज़ुक और ख़ूबसूरत हो, मगर ऐसे होने का क्या फ़ायदा?

विस्तार

यहाँ शायर महबूब के हुस्न और नज़ाकत का एहतराम तो करता है, लेकिन बड़ी बेबाकी से यह हक़ीक़त भी सामने रख देता है कि सिर्फ़ चेहरा ख़ूबसूरत होने से कोई ख़ास नहीं बन जाता। अगर दिल में मुरव्वत यानी हमदर्दी और वफ़ादारी का नाम-ओ-निशान न हो, तो सारा हुस्न बेमायने और खोखला रह जाता है। यह शेर दरअसल यह सिखाता है कि दिल की अच्छाई और ख़ुलूस के बिना महज़ ज़ाहिरी ख़ूबसूरती किसी काम की नहीं होती।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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