कहा मैं ने कि आँसू आँख का लेकिन नहीं थमता कहा आँखें कोई तलवों से मल डाले अगर क्या हो

“I said: 'And yet the tears from these eyes refuse to cease.' / She said: 'What if one were to rub those eyes beneath my soles?'”

— नज़्म तबातबाई
अर्थ

मैंने कहा कि मेरी आँखों से आँसू रुकने का नाम नहीं लेते, तो उसने जवाब दिया कि अगर कोई तुम्हारी इन आँखों को अपने पैरों के तलवों से कुचल या रगड़ दे तो क्या हो?

विस्तार

इस शे'र में आशिक़ और महबूब के बीच का एक बेहद तीखा और दिलकश संवाद है। जब आशिक़ तड़प कर कहता है कि मेरी आँखों के आँसू किसी तरह नहीं रुक रहे, तो महबूब बड़े नाज़ और बेपरवाही से कहती है कि अगर इन आँखों को मेरे तलवों से रगड़ दिया जाए तो कैसा रहे? यहाँ महबूब का यह अंदाज़ ज़ाहिर तौर पर बेदर्दी भरा लगता है, लेकिन आशिक़ के लिए महबूब के क़दमों की धूल बन जाना ही मोहब्बत की सबसे बड़ी मंज़िल और सुकून है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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