ला सका नज़्ज़ारा-ए-रुख़्सार-ए-रौशन की न ताब जा के आईने पे चेहरे की ज़िया उल्टी फिरी

“Unable to endure the sight of that luminous cheek, striking the mirror, the radiance of the face turned back in retreat.”

— नज़्म तबातबाई
अर्थ

आईना उस रोशन गाल के दीदार की ताब न ला सका, और चेहरे का नूर आईने से टकराकर वापस लौट आया।

विस्तार

शायर ने यहाँ महबूब के हुस्न की चमक को बयां करने के लिए बड़ा ही दिलकश अंदाज़ अपनाया है। वो कहते हैं कि महबूब का चेहरा इतना नूरानी है कि आईना भी उस नूर की ताब न ला सका और बेबस हो गया। रोशनी का आईने से टकराकर वापस लौटना तो कुदरती है, मगर शायर ने इसे यूँ ढाला है मानो आईना उस बेपनाह ख़ूबसूरती के सामने ठहरने की हिम्मत ही न जुटा पाया हो।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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