“Seeing me draw my dying breath upon the night of separation, in a single breath the breeze flew to her and returned in haste.”
जुदाई की रात मुझे अंतिम साँसें लेते देखकर, सुबह की हवा एक ही पल में महबूब के पास जाकर तुरंत वापस लौट आई।
इस शेर में जुदाई के दर्द में तड़पते आशिक़ के आखिरी पलों का बेहद भावुक मंज़र खींचा गया है। जब सुबह की हवा (सबा) ने देखा कि आशिक़ की आखिरी और 'उल्टी साँस' चल रही है, तो वह घबराकर पलक झपकते ही महबूब के पास गई और फौरन लौट आई ताकि उसकी कोई खबर या खुशबू ला सके। यहाँ 'उल्टी साँस' और सबा का 'उल्टी फिरना' (लौट आना) लफ़्ज़ों का बड़ा खूबसूरत खेल है, जो दिखाता है कि आशिक़ को बचाने के लिए कुदरत भी वक्त से होड़ लगा रही है।
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