ग़ज़ल

धीरे-धीरे रे मना , धीरे सब कुछ होय। माली सींचे सौ घड़ा , ॠतु आए फल होय॥

धीरे-धीरे रे मना , धीरे सब कुछ होय। माली सींचे सौ घड़ा , ॠतु आए फल होय॥
कबीर· Ghazal· 10 shers

कबीर की यह ग़ज़ल धैर्य का महत्व बताती है कि प्रयास सही समय पर ही फल देते हैं। यह गुरु की सर्वोपरि महत्ता पर जोर देती है कि ईश्वर के रूठने पर भी गुरु आश्रय हैं, जबकि गुरु के रूठने पर कोई ठौर नहीं। यह ईश्वर स्मरण के लिए समय समर्पित करने का आग्रह भी करती है, यह चेतावनी देते हुए कि जीवन क्षणभंगुर है और आध्यात्मिक साधना के अभाव में मुक्ति संभव नहीं।

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लिपि व अर्थ
1
धीरे-धीरे रे मना , धीरे सब कुछ होय। माली सींचे सौ घड़ा , ॠतु आए फल होय॥
हे मन, धीरे-धीरे यह जान ले कि सब कुछ धीरे-धीरे होता है। जिस प्रकार माली सौ घड़े पानी से सींचता है, पर फल तो ऋतु आने पर ही लगता है।
2
कबीरा ते नर अन्ध है , गुरु को कहते और। हरि रूठे गुरु ठौर है , गुरु रुठै नहीं ठौर॥
कबीरा कहता है कि मनुष्य अंधा है और वह यह बात गुरु से कहता है। वह कहता है कि हरि (ईश्वर) रुष्ट हैं और गुरु ही उनका ठिकाना है, पर वास्तव में गुरु रुष्ट नहीं होते और कोई ठिकाना नहीं होता।
3
पाँच पहर धन्धे गया , तीन पहर गया सोय। एक पहर हरि नाम बिन , मुक्ति कैसे होय॥
पाँच पहर बीत गए, तीन पहर सो गए। एक पहर हरि नाम के बिना, मुक्ति कैसे हो सकती है।
4
कबीरा सोया क्या करे , उठि न भजे भगवान। जम जब घर ले जायेंगे , पड़ी रहेगी म्यान॥
कबीरा सो गया तो क्या करे, और भगवान के पास नहीं जा सका। जब यम उसे घर ले जाएंगे, तो म्यान पड़ी रहेगी।
5
शीलवन्त सबसे बड़ा , सब रतनन की खान। तीन लोक की सम्पदा , रही शील में आन॥
शील (good conduct) सबसे बड़ा है, और वह सभी रत्नों का भंडार है। तीनों लोकों की संपत्ति शील में निवास करती है।
6
माया मरी न मन मरा , मर-मर गए शरीर। आशा तृष्णा न मरी , कह गए दास कबीर॥
माया मरी न मन मरा, मर-मर गए शरीर। आशा तृष्णा न मरी, कह गए दास शायर। इसका शाब्दिक अर्थ है कि माया और मन नहीं मरे, बल्कि केवल शरीर नष्ट हो गए। आशा और तृष्णा भी नहीं मरे, ऐसा दास शायर कह गया है।
7
माटी कहे कुम्हार से , तु क्या रौंदे मोय। एक दिन ऐसा आएगा , मैं रौंदूंगी तोय॥
माटी (मिट्टी) कुम्हार से कहती है कि, 'तुम मुझे क्यों रौंदते हो? एक दिन ऐसा आएगा जब मैं तुम्हें रौंदूंगी।'
8
रात गंवाई सोय के , दिवस गंवाया खाय। हीना जन्म अनमोल था , कोड़ी बदले जाय॥
सोने में रात गुज़ार देना और खाने में दिन गुज़ार देना। यह जीवन कितना अनमोल है कि इसे एक कौड़ी के बदले नहीं बदला जा सकता।
9
नींद निशानी मौत की , उठ कबीरा जाग। और रसायन छांड़ि के , नाम रसायन लाग॥
नींद मौत की निशानी है, कबीरा, जागो। और रसायन त्याग कर, नाम को रसायन बना लो।
10
जो तोकु कांटा बुवे , ताहि बोय तू फूल। तोकू फूल के फूल है , बाकू है त्रिशूल॥
जो स्थान काँटा उगाता है, वहाँ फूल उगा दो। हालाँकि तुम्हारा फूल एक फूल है, तुम्हारा खंभा (या आधार) त्रिशूल है।
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