लज़्ज़तें हैं दुश्मन-ए-औज-ए-कमाल — जिगर मुरादाबादी

लज़्ज़तें हैं दुश्मन-ए-औज-ए-कमाल कुल्फ़तों से जी लगाना चाहिए

“Pleasures are the sworn foes of perfection's zenith; it is with hardships that the heart must fall in love.”

— जिगर मुरादाबादी

अर्थ

सांसारिक सुख और ऐश-ओ-आराम इंसान को बुलंदी या पूर्णता के शिखर तक पहुँचने से रोकते हैं, इसलिए इंसान को कठिनाइयों और तकलीफ़ों से दिल लगाना चाहिए।

विस्तार

यह शेर हमें ज़िंदगी की एक बहुत गहरी सच्चाई सिखाता है कि आराम और आसान खुशियाँ इंसान को महान बनने से रोकती हैं। 'औज-ए-कमाल' यानी बुलंदी और पूर्णता के शिखर तक पहुँचने के लिए संघर्ष की आग में तपना पड़ता है। शायर कहते हैं कि तकलीफ़ों और मुश्किलों ('कुल्फ़त') से भागने के बजाय उन्हें गले लगाना चाहिए, क्योंकि वही हमारे हुनर और आत्मा को तराश कर कुंदन बनाती हैं।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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