कहाँ वो शोख़ मुलाक़ात ख़ुद से भी न हुई — जिगर मुरादाबादी

कहाँ वो शोख़ मुलाक़ात ख़ुद से भी न हुई बस एक बार हुई और फिर कभी न हुई

“Where was that spirited encounter? I could not even meet myself again; it happened but once, and never thereafter.”

— जिगर मुरादाबादी

अर्थ

वह शोख़ मुलाक़ात दोबारा कभी नहीं हुई, यहाँ तक कि खुद अपने आप से भी न हो सकी; वह बस एक ही बार हुई थी और उसके बाद फिर कभी नहीं हुई।

विस्तार

यह शेर उस एक मुलाक़ात की याद दिलाता है जो इतनी जादुई और गहरी थी कि उसने इंसान को अंदर तक बदल दिया। वह शोख़ और ज़िंदादिल पल केवल किसी और से नहीं, बल्कि अपनी ही ज़िंदगी से रूबरू होने जैसा था, मगर अफ़सोस कि वह करिश्मा सिर्फ़ एक ही बार हुआ। उसके बाद से शायर ख़ुद अपने आप से भी बेगाना हो गया है, मानो उस एक लम्हे के गुज़रते ही उसने अपनी पहचान भी खो दी हो।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठUnavailable
हिंदी अर्थUnavailable
अंग्रेज़ी अर्थUnavailable
हिंदी विस्तारUnavailable
अंग्रेज़ी विस्तारUnavailable
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.