तिरी ख़ुशी से अगर ग़म में भी ख़ुशी न हुई — जिगर मुरादाबादी

तिरी ख़ुशी से अगर ग़म में भी ख़ुशी न हुई वो ज़िंदगी तो मोहब्बत की ज़िंदगी न हुई

“If in your pleasure even sorrow brings no joy, that life was never truly a life of love.”

— जिगर मुरादाबादी

अर्थ

अगर तुम्हारी ख़ुशी की ख़ातिर ग़म में भी ख़ुशी न मिले, तो ऐसी ज़िंदगी वास्तव में मोहब्बत की ज़िंदगी नहीं हो सकती।

विस्तार

इस शेर में शायर सच्चे इश्क़ की उस गहराई को बयां करता है जहाँ आशिक़ की अपनी कोई ज़ात या मर्ज़ी नहीं बचती। अगर महबूब की ख़ुशी के ख़ातिर मिला हुआ ग़म भी दिल को सुकून और राहत न दे, तो वैसी ज़िंदगी को सच्ची मोहब्बत की ज़िंदगी नहीं कहा जा सकता। यहाँ प्यार का मतलब खुदगर्ज़ी नहीं, बल्कि महबूब की रज़ा में हर दर्द को भी नेमत समझकर कुबूल कर लेना है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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