ख़याल-ए-यार सलामत तुझे ख़ुदा रक्खे — जिगर मुरादाबादी
“May God keep you safe, O memory of my beloved; without you, this home was never graced with light.”
अर्थ
ऐ महबूब के ख़याल, ख़ुदा तुझे सलामत रखे, क्योंकि तेरे बिना इस घर में कभी रोशनी नहीं हुई।
विस्तार
यहाँ शायर अपने महबूब की याद और उसके ख़याल से एक सच्चे दोस्त की तरह मुख़ातब है और उसके हमेशा ज़िंदा रहने की दुआ माँग रहा है। शेर में 'घर' दरअसल शायर का तन्हा दिल और उसका वजूद है, जो जुदाई के अंधेरे में डूबा हुआ है। जब महबूब पास नहीं होता, तो सिर्फ़ उसकी प्यारी यादें ही एक चराग़ बनकर जलती हैं और ज़िंदगी के सूनेपन को रौशन कर देती हैं।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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