वाह-रे शौक़-ए-शहादत कू-ए-क़ातिल की तरफ़ — जिगर मुरादाबादी
“O, this passion for martyrdom! Toward the slayer's lane I go / Humming a song, dancing in rapture, swaying to and fro.”
अर्थ
शहादत का यह कैसा अद्भुत शौक है कि मैं गुनगुनाता, नाचता और झूमता हुआ अपने क़ातिल की गली की ओर जा रहा हूँ।
विस्तार
इस शेर में शायर ने मौत या क़ुर्बानी के ख़ौफ़ को मिटाकर उसे एक रूहानी जश्न में बदल दिया है। 'क़ातिल की गली' की तरफ़ बढ़ते हुए आशिक़ के दिल में ज़रा भी झिझक नहीं, बल्कि अपने महबूब या मक़सद पर न्योछावर होने की ऐसी बेख़ुदी है कि वह झूमता और गाता हुआ जा रहा है। यह शेर बयां करता है कि जब इश्क़ और शहादत का जुनून अपनी इंतिहा पर पहुँचता है, तो फ़ना हो जाना भी सबसे बड़ी ख़ुशी बन जाता है।
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