या वो सूरत ख़ुद जहान-ए-रंग-ओ-बू महकूम था — जिगर मुरादाबादी
“Either that state, where the world of hue and scent was bowed to my command; / Or this plight now, where I am crushed beneath the weight of my own shadow.”
अर्थ
या तो वह दौर था जब सारी दुनिया मेरे अधीन थी, या फिर अब यह हाल है कि मैं अपने ही साए से दबा जा रहा हूँ।
विस्तार
इस शेर में शायर ने अपने गुज़रे हुए दौर के रुतबे और आज की बेबसी के बीच का गहरा फ़र्क दिखाया है। एक ज़माना वह था जब यह पूरी खूबसूरत दुनिया उनके हुक्म की पाबंद थी और उनका दबदबा था, मगर आज आलम यह है कि वे अपने ही साए के ख़ौफ़ और बोझ तले दबे जा रहे हैं। यह तक़दीर के उस अजीब उलटफेर की दास्तान है, जहाँ इंसान कभी अर्श पर होता है और कभी अपने ही वजूद से डरने लगता है।
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