“What has come over those who deal in cruelty? For having stayed faithful, it is we who feel ashamed.”
ज़ुल्म और सितम करने वालों को न जाने क्या हो गया है, क्योंकि वफ़ा निभाने के बावजूद हम ही शर्मिंदा हो रहे हैं।
यह शेर दिल के एक गहरे और उल्टे सच को बयान करता है, जहाँ सितम ढाने वाले तो बेपरवाह घूम रहे हैं, लेकिन सच्चा प्यार निभाने वाला खुद ही शर्मिंदा महसूस कर रहा है। मोहब्बत की दुनिया का दस्तूर जैसे उलट गया है; बेवफ़ाई करने वाले को कोई पछतावा नहीं, और वफ़ादार अपनी ही सादगी और नेकी पर झेंप रहा है। शायर यहाँ गुस्से के बजाय एक दर्द भरी हैरानी से पूछता है कि आख़िर ज़माने का अंदाज़ किस कदर बदल चुका है।
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