हुजूम-ए-जल्वा में परवाज़-ए-शौक़ क्या कहना कि जैसे रूह सितारों के दरमियाँ गुज़रे

“Amidst the throng of radiant splendors, how wondrous is longing's flight—as if a soul were gliding amidst the stars.”

— जिगर मुरादाबादी
अर्थ

जल्वे और नज़ारों की भीड़ में तड़प व चाहत की यह उड़ान कितनी अद्भुत है, मानो कोई रूह सितारों के बीच से गुज़र रही हो।

विस्तार

इस शेर में चारों तरफ बिखरी खूबसूरती और तजल्लियों के बीच दिल की बेपनाह चाहत की उड़ान की तारीफ की गई है। शायर कहता है कि इस हुस्न और नूरानी माहौल में इश्क का सफर ऐसा लगता है मानो कोई पाक रूह सितारों के झुरमुट के बीच से बेरोक-टोक गुजर रही हो। यह एक ऐसा रूहानी अहसास है जहाँ तमन्ना किसी बोझ की तरह नहीं, बल्कि पंख बनकर इंसान को कायनात के पार ले जाती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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