उसी को कहते हैं जन्नत उसी को दोज़ख़ भी वो ज़िंदगी जो हसीनों के दरमियाँ गुज़रे

“They call it paradise, and they name it hell as well—that life which is spent amidst the company of the fair.”

— जिगर मुरादाबादी
अर्थ

वह ज़िंदगी जो सुंदर लोगों के दरमियान गुज़रती है, उसी को स्वर्ग (जन्नत) भी कहा जाता है और उसी को नर्क (दोज़ख़) भी।

विस्तार

यह शे'र इश्क़ और हुस्न की उस कशमकश को बयां करता है जो एक साथ सुख भी देती है और दर्द भी। खूबसूरत महबूबों के दरमियां ज़िंदगी गुज़ारना जन्नत इसलिए लगता है क्योंकि उनका दीदार दिल को बेपनाह ख़ुशी देता है, मगर यही ज़िंदगी दोज़ख़ (नर्क) भी बन जाती है जब बेरुखी, तड़प और दिल टूटने का अज़ाब झेलना पड़ता है। शायर बड़ी नज़ाकत से समझाता है कि जहाँ बेपनाह ख़ूबसूरती होगी, वहाँ बेचैनी और जलन की आग भी लाज़मी है।

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