ख़ुलूस जिस में हो शामिल वो दौर-ए-इश्क़-ओ-हवस न राएगाँ कभी गुज़रा न राएगाँ गुज़रे

“That era of love and desire, imbued with true sincerity, has never passed in vain, nor shall it ever pass in vain.”

— जिगर मुरादाबादी
अर्थ

इश्क़ और चाहत का वह दौर जिसमें सच्चा ख़ुलूस शामिल हो, न तो कभी व्यर्थ बीता है और न कभी व्यर्थ बीतेगा।

विस्तार

शायर यहाँ इश्क़ और तमन्नाओं के उस दौर की बात कर रहे हैं, जो अक्सर बीत जाने के बाद अधूरा या ज़ाया सा लगने लगता है। उनका मानना है कि अगर जज़्बों में सच्चाई और ख़ुलूस शामिल हो, तो चाहत का कोई भी लम्हा कभी बेकार नहीं जाता। सच्चा दिल जब भी किसी के लिए धड़कता है, वह ज़िंदगी को एक गहरा मक़सद और पाकीज़गी दे जाता है—चाहे वह दौर कल गुज़रा हो या आने वाले कल में गुज़रे।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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