“In love, from seeking torment I have found relief at last: grief is now my very soul, and pain has become my heart.”
इश्क़ में तकलीफ़ चाहने की आदत से मुझे सुकून मिल गया है; अब ग़म मेरी जान बन गया है और दर्द मेरा दिल बन चुका है।
इस शेर में आशिक़ मोहब्बत के उस मक़ाम की बात कर रहा है जहाँ दर्द कोई पराई चीज़ नहीं रह जाता। पहले वह अपने इश्क़ को साबित करने के लिए ख़ुद तकलीफ़ की तलाश में रहता था, मगर अब ग़म उसकी जान और दर्द उसका दिल ही बन चुका है। जब दुख इंसान के वजूद में इस कदर घुल जाए कि उससे अलग कुछ बचे ही न, तो बेचैनी ख़त्म हो जाती है और एक अजीब सा गहरा सुकून हासिल होता है।
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