ग़ज़ल
उग रहा है दर-ओ-दीवार पे सब्ज़ा 'ग़ालिब'
اگ رہا ہے در و دیوار پہ سبزہ 'غالب'
यह ग़ालिब की ग़ज़ल जीवन की विरोधाभासी प्रकृति को दर्शाती है। यह उन पंक्तियों से शुरू होती है जहाँ कवि देखता है कि उसके घर की सूनी दीवारों पर हरियाली उग रही है, जबकि वह स्वयं वीराने में भटक रहा है, जो उसकी आंतरिक स्थिति और बाहरी दुनिया के बीच के अंतर को उजागर करता है। ग़ज़ल आगे पछतावे, वफ़ादारी के गहरे दर्द और जीवन की कठिनाइयों के बीच धैर्य में मिलने वाली शांत सहनशीलता जैसे विषयों को भी छूती है।
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1
उग रहा है दर-ओ-दीवार पे सब्ज़ा 'ग़ालिब'
हम बयाबाँ में हैं और घर में बहार आई है
दरवाज़ों और दीवारों पर घास उग रही है, ग़ालिब। मैं जंगल में हूँ और मेरे घर में बहार आ गई है।
2
फ़ुर्सत-ए-आईना-ए-सद-रंग-ए-ख़ुद-आराई है
रोज़-ओ-शब यक कफ़-ए-अफ़सोस-ए-तमाशाई है
स्वयं को सजाने-संवारने वाले सैकड़ों रंग के दर्पण में बहुत फ़ुर्सत है, परंतु दिन और रात केवल एक दर्शक के अफ़सोस की एक मुट्ठी भर ही रह जाते हैं।
3
वहशत-ए-ज़ख़्म-ए-वफ़ा देख कि सर-ता-सर दिल
बख़िया जूँ जौहर-ए-तेग़ आफ़त-ए-गीराई है
वफ़ा के ज़ख़्म की तीव्र पीड़ा देखो; पूरे दिल में लगे उसके टाँके तलवार के जौहर (धार की चमक) की तरह पकड़ने में अत्यंत खतरनाक हैं।
4
शम्अ'-आसा चे सर-ए-दा'वा व कू पा-ए-सबात
गुल-ए-सद-शो'ला ब-यक -जेब-ए-शकेबाई है
एक शम्अ' (मोमबत्ती) के समान, स्थायित्व का क्या दावा और कहाँ उसका दृढ़ पाँव? सौ शोले वाला एक फूल धैर्य की एक जेब में समाया है।
5
नाला-ए-ख़ूनीं वरक़-ओ-दिल गुल-ए-मज़मून-ए-शफ़क़
चमन-आरा-ए-नफ़स वहशत-ए-तन्हाई है
मेरा खूनी विलाप एक पृष्ठ है, और मेरा हृदय शफ़क़ (गोधूलि की लालिमा) के विषय वाला एक फूल है। तन्हाई की वहशत (वीरानी) मेरी साँस के चमन (बगीचे) को सजाती है।
6
बू-ए-गुल फ़ित्ना-ए-बेदार-ओ-चमन जामा-ए-ख़्वाब
वस्ल बर रंग-ए-तपिश किसवत-ए-रुस्वाई है
गुलाब की खुशबू एक जागी हुई शरारत है, जबकि बाग नींद का लिबास है। मिलन, अपनी बेचैनी की गर्मी में, बदनामी का पहनावा है।
7
शर्म तूफ़ान-ए-ख़िज़ाँ रंग-ए-तरब-गाह-ए-बहार
माहताबी ब-कफ़-ए-चश्म-ए-तमाशाई है
शर्म वसंत के आनंदमय बाग के रंगीन माहौल के लिए पतझड़ के तूफान जैसी है। हालांकि, यह दर्शक की आंख में समाया हुआ एक चांदनी का नज़ारा है।
8
बाग़-ए-ख़ामोशी-ए-दिल से सुख़न-ए-'इश्क़ 'असद'
नफ़स-ए-सोख़्ता रम्ज़-ए-चमन ईमाई है
ऐ असद, दिल की ख़ामोशी के बाग़ से ही प्रेम की बातें निकलती हैं। मेरी जली हुई (गहरी) साँस ही बाग़ के रहस्य का संकेत देती है।
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